दी लल्लनटॉप

4.5 समाचार और पत्रिकाएं 4 सितंबर 2026 को अपडेट किया गया

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खूबियाँ

  • समसामयिक खबरों को सरल और बेबाक अंदाज़ में पेश करता है।
  • वीडियो
  • लेख और पॉडकास्ट जैसे कई कंटेंट फॉर्मेट उपलब्ध हैं।
  • हिंदी भाषा में युवाओं के लिए आकर्षक और सहज प्रस्तुति।
  • राजनीति
  • मनोरंजन और सामाजिक मुद्दों पर विविध कवरेज मिलता है।
  • नियमित अपडेट के कारण नई खबरों तक जल्दी पहुंच बनती है।

कमियाँ

  • कुछ खबरों की प्रस्तुति में राय और विश्लेषण का प्रभाव अधिक दिख सकता है।
  • वीडियो-केंद्रित सामग्री देखने में मोबाइल डेटा जल्दी खर्च हो सकता है।
  • कभी-कभी नोटिफिकेशन की संख्या अधिक महसूस हो सकती है।
  • गंभीर विषयों की शैली सभी पाठकों को समान रूप से पसंद नहीं आएगी।
  • कुछ सामग्री का अनुभव बेहतर बनाने के लिए स्थिर इंटरनेट जरूरी है।
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Mobexer विश्लेषणकर्ता Mobexer

पहली बार दी लल्लनटॉप खोलने पर मुझे यह सामान्य न्यूज़ ऐप से अलग महसूस हुआ। इसका आकर्षण केवल खबरें पढ़ने में नहीं, बल्कि खबरों के पीछे का नजरिया समझने में है। टीवी टुडे नेटवर्क लिमिटेड का यह समाचार और पत्रिका ऐप उन पाठकों के लिए बनाया गया लगता है जिन्हें सुर्खियों के साथ उनका संदर्भ, भाषा और सामाजिक असर भी जानना होता है। ऐप मुफ्त है, 3+ के लिए रेट किया गया है और इसका मौजूदा संस्करण 2.16.6 है।

मेरे अनुभव में इसकी सबसे बड़ी ताकत इसका हिंदी-केंद्रित अंदाज है। यहां खबर को बहुत औपचारिक या अखबारी भाषा में पेश करने के बजाय बातचीत जैसी शैली अपनाई जाती है। इससे राजनीति, समाज, मनोरंजन और रोजमर्रा के चर्चित मुद्दों पर सामग्री पढ़ना आसान लगता है। लेकिन यही शैली हर पाठक को पसंद आए, ऐसा जरूरी नहीं। अगर आप केवल तेज, छोटे और पूरी तरह निष्पक्ष बुलेटिन चाहते हैं, तो यह ऐप आपको कभी-कभी ज्यादा व्याख्यात्मक या राय-प्रधान लग सकता है।

पहले सप्ताह का आकर्षण: खबर से आगे बढ़ता हुआ अनुभव

पहले सप्ताह में इस ऐप की उपयोगिता मुख्य रूप से इसकी प्रस्तुति से सामने आती है। सामान्य न्यूज़ ऐप में मैं अक्सर शीर्षक देखकर आगे बढ़ जाता हूं, क्योंकि हर खबर एक जैसी लगने लगती है। यहां विषयों को कहानी, टिप्पणी और दृश्यात्मक प्रस्तुति के मिश्रण से देखने का मौका मिलता है। इसका स्टोर सार भी इसी दिशा की ओर इशारा करता है: यह केवल न्यूज़ नहीं, व्यूज पर भी जोर देता है।

मेरे लिए इसका एक व्यावहारिक उपयोग सुबह का त्वरित समाचार सत्र रहा। दिन शुरू करने से पहले मैं प्रमुख विषयों पर नजर डाल सकता हूं और फिर उन खबरों को चुन सकता हूं जिनमें पृष्ठभूमि या विश्लेषण चाहिए। यह तरीका उन लोगों के लिए अच्छा है जो हर घटना पर अलग-अलग वेबसाइट खोजने के बजाय एक ही जगह से हिंदी में समझ बनाना चाहते हैं।

ऐप की भाषा इसकी पहुंच बढ़ाती है, खासकर उन पाठकों के लिए जिन्हें अंग्रेजी समाचार ऐप की शब्दावली थकाऊ लगती है। शीर्षक और व्याख्या आम बोलचाल के करीब होने से जटिल मुद्दे कम दूर लगते हैं। फिर भी, आसान भाषा का अर्थ हमेशा सरल विषय नहीं होता। संवेदनशील राजनीतिक या सामाजिक खबरों को पढ़ते समय मुझे शीर्षक के साथ पूरा लेख देखने की आदत बनानी पड़ी, क्योंकि केवल शुरुआती पंक्तियों से पूरी तस्वीर नहीं मिलती।

पहले सप्ताह में एक और मजबूत पक्ष सामने आता है: यह ऐप केवल “क्या हुआ” पर रुकने के बजाय “इसका मतलब क्या है” वाला सवाल उठाता है। यही वह अंतर है जो इसे सामान्य ब्रेकिंग-न्यूज़ फीड से अलग बनाता है। अगर आप किसी मुद्दे पर बातचीत में हिस्सा लेना चाहते हैं, तो संदर्भ वाली सामग्री आपको केवल सूचना नहीं, चर्चा के लिए आधार भी देती है।

हालांकि, नए उपयोगकर्ता को शुरुआत में सामग्री की विविधता थोड़ी बिखरी हुई लग सकती है। एक ही सत्र में गंभीर खबर, मनोरंजन, सामाजिक टिप्पणी और हल्की-फुल्की सामग्री के बीच जाना पड़ सकता है। यह मिश्रण ऐप को जीवंत बनाता है, लेकिन अगर आपकी पढ़ने की आदत बहुत व्यवस्थित है, तो आपको अपनी पसंद के विषय चुनकर उपयोग करना बेहतर लगेगा।

किसके लिए पहला सप्ताह सबसे उपयोगी है

मैं इसे उन पाठकों को सुझाऊंगा जो हिंदी में समाचार पढ़ते हैं, लेकिन केवल सूखी सुर्खियां नहीं चाहते। कॉलेज जाने वाला छात्र किसी समसामयिक मुद्दे की पृष्ठभूमि समझने के लिए इसका इस्तेमाल कर सकता है। नौकरीपेशा व्यक्ति दिन की बड़ी खबरों को छोटे सत्रों में देख सकता है। घर में समाचार पर चर्चा करने वाले पाठक भी यहां से विषय चुन सकते हैं, क्योंकि सामग्री का अंदाज बातचीत शुरू करने वाला है।

इसके विपरीत, शेयर बाजार के बेहद सटीक और तत्काल आंकड़े, अत्यधिक स्थानीय खबरें या केवल आधिकारिक प्रेस-रिलीज जैसी सामग्री खोजने वाला उपयोगकर्ता किसी विशेष स्रोत या समर्पित ऐप से बेहतर अनुभव पा सकता है। यह ऐप त्वरित सूचना-पट्ट से अधिक एक संपादकीय समाचार अनुभव है—और इसे उसी उम्मीद के साथ इस्तेमाल करना चाहिए।

महीने-दर-महीने मूल्य: क्या आदत बनती है?

किसी न्यूज़ ऐप का असली परीक्षण डाउनलोड के बाद नहीं, कुछ सप्ताह बीतने पर होता है। शुरुआत में नया अंदाज आकर्षित करता है, लेकिन लंबे समय में सवाल यह रहता है कि क्या हर दिन लौटने की कोई वजह बचती है। मेरे हिसाब से इस ऐप की स्थायी उपयोगिता इसकी राय और संदर्भ वाली सामग्री में है, न कि केवल ताजा सुर्खियों में।

अगर मैं इसे रोज केवल ब्रेकिंग अपडेट के लिए खोलूं, तो इसका मूल्य सीमित हो सकता है। बड़ी खबरें दूसरे प्लेटफॉर्म पर भी मिल जाती हैं, और कई बार वहां सूचना पहले दिख सकती है। लेकिन जब मैं किसी घटना की पृष्ठभूमि, उसके सामाजिक असर या उसके आसपास चल रही बहस को समझना चाहता हूं, तब यह ऐप अधिक उपयोगी बनता है। इस अंतर को समझना जरूरी है, क्योंकि यही तय करता है कि ऐप फोन में लंबे समय तक रहेगा या कुछ दिनों बाद भुला दिया जाएगा।

मेरी सलाह है कि इसे लगातार स्क्रॉल करने के बजाय तय समय पर इस्तेमाल करें। उदाहरण के लिए, सुबह केवल मुख्य खबरें देखें और शाम को एक-दो विस्तार वाली सामग्री चुनें। इस तरह ऐप सूचना के शोर में बदलने के बजाय दिनचर्या का छोटा, नियंत्रित हिस्सा बना रहता है। यह तरीका खास तौर पर उन लोगों के लिए काम करता है जो समाचारों से जुड़े रहना चाहते हैं, लेकिन हर घंटे नोटिफिकेशन या अंतहीन फीड में नहीं फंसना चाहते।

लंबे समय में इसकी दूसरी उपयोगिता भाषा और दृष्टिकोण से आती है। हिंदी में समाचार पढ़ने की आदत रखने वाले पाठक के लिए यह केवल अनुवादित सामग्री जैसा अनुभव नहीं देता; इसकी प्रस्तुति भारतीय संदर्भ और बोलचाल के करीब रहती है। इससे उन विषयों पर भी ध्यान जाता है जिन्हें हम सामान्यतः शीर्षक देखकर छोड़ देते हैं। मेरे लिए यही दोबारा लौटने का वास्तविक कारण है।

फिर भी, महीने-दर-महीने अनुभव पूरी तरह समान नहीं रहेगा। समाचार चक्र में कुछ दिन बहुत व्यस्त होते हैं और कुछ दिन सामग्री कम जरूरी लग सकती है। अगर आपकी रुचि केवल एक क्षेत्र, जैसे तकनीक या खेल, में है, तो व्यापक संपादकीय मिश्रण आपको हमेशा प्रासंगिक नहीं लगेगा। ऐसे पाठक के लिए विषय-विशेष ऐप अधिक कुशल विकल्प हो सकता है।

दूसरे न्यूज़ विकल्पों से तुलना

अखबारों के ऐप आमतौर पर विस्तृत रिपोर्ट, औपचारिक भाषा और स्रोत-संगठित प्रस्तुति पर जोर देते हैं। टीवी न्यूज़ ऐप तेज वीडियो अपडेट और लाइव कवरेज के लिए बेहतर हो सकते हैं। सोशल मीडिया सबसे पहले चर्चा दिखा देता है, लेकिन वहां अफवाह, अधूरी जानकारी और संदर्भ की कमी का जोखिम भी अधिक रहता है।

दी लल्लनटॉप इन तीनों के बीच अपनी जगह बनाता है। यह केवल अखबार जैसा गंभीर नहीं, केवल टीवी जैसा तात्कालिक नहीं और सोशल मीडिया जैसा अनियंत्रित भी नहीं लगता। इसका केंद्र संपादकीय आवाज और समझाने वाली शैली है। लेकिन इसी कारण यह हर खबर के लिए सबसे अच्छा स्रोत नहीं बनता। आधिकारिक घोषणा, कानूनी दस्तावेज या बहुत सटीक तथ्य-जांच के लिए मैं मूल स्रोत या विशेष रिपोर्टिंग वाले मंच को प्राथमिकता दूंगा।

इस तुलना से एक महत्वपूर्ण उपयोग-रणनीति निकलती है: इसे अपने एकमात्र समाचार स्रोत के रूप में नहीं, बल्कि समझ और संदर्भ के साथी के रूप में रखें। पहले यहां से विषय समझें, फिर जरूरी होने पर मूल रिपोर्ट या आधिकारिक स्रोत तक जाएं। इस दो-स्तरीय तरीके से इसकी सहज भाषा का लाभ मिलता है, जबकि गंभीर निर्णयों के लिए अतिरिक्त पुष्टि भी बनी रहती है।

रखरखाव का बोझ: ऐप को उपयोगी बनाए रखने की आदत

इस तरह के ऐप का रखरखाव तकनीकी से ज्यादा मानसिक होता है। इसे फोन में रखना आसान है, लेकिन इसे उपयोगी बनाए रखने के लिए यह तय करना पड़ता है कि मैं कब खोलूंगा, किन विषयों पर रुकूंगा और किन सामग्री को तुरंत पढ़ने की जरूरत नहीं है। अगर मैं हर शीर्षक पर टैप करता रहूं, तो समाचार पढ़ना जल्दी ही समय खा सकता है।

मेरे अनुभव में सबसे अच्छा तरीका है कि ऐप खोलने से पहले अपना उद्देश्य तय करूं। क्या मुझे दिन की मुख्य खबरें देखनी हैं, किसी विवाद का संदर्भ समझना है या केवल हल्का ब्रेक चाहिए? उद्देश्य स्पष्ट होने पर सामग्री का चयन बेहतर होता है। बिना योजना के स्क्रॉल करने पर राय, वीडियो और सुर्खियों का मिश्रण ध्यान को एक विषय से दूसरे विषय पर ले जाता है।

ऐप मुफ्त है, इसलिए इसे आजमाने में आर्थिक जोखिम नहीं है। लेकिन मुफ्त होने का अर्थ यह नहीं कि समय की कोई कीमत नहीं। यदि आप रोज लंबे समय तक समाचार देखते हैं, तो अपनी स्क्रीन-टाइम सीमा और पढ़ने का समय तय करना उपयोगी रहेगा। इस ऐप की शैली आकर्षक है, इसलिए “बस एक सामग्री और” वाला व्यवहार आसानी से बन सकता है।

एंड्रॉयड उपयोगकर्ताओं के लिए न्यूनतम जरूरत 8.0 है। इसका अर्थ है कि अपेक्षाकृत पुराने, लेकिन बहुत पुराने नहीं, उपकरणों पर भी इसे चलाने की संभावना रहती है। फिर भी वास्तविक सहजता फोन की गति, नेटवर्क और सामग्री के प्रकार पर निर्भर करेगी। धीमे इंटरनेट पर दृश्यात्मक या वीडियो-केंद्रित सामग्री का अनुभव उतना अच्छा नहीं रह सकता, इसलिए यात्रा के दौरान इसे मुख्य समाचार साधन मानने से पहले अपने कनेक्शन को ध्यान में रखना चाहिए।

लंबे उपयोग में एक व्यावहारिक सावधानी यह भी है कि हर खबर को समान महत्व न दें। ऐप का संपादकीय अंदाज आपको विषयों के भीतर खींच सकता है, लेकिन पाठक को अपनी प्राथमिकता बनाए रखनी होगी। चुनाव, सामाजिक विवाद या भावनात्मक घटनाओं के समय यह खास तौर पर जरूरी है, क्योंकि लगातार ऐसी सामग्री देखने से समाचार उपयोगी जानकारी के बजाय तनाव का स्रोत बन सकता है।

एक रोजमर्रा का उदाहरण

मान लीजिए मैं काम पर जाने से पहले फोन खोलता हूं और किसी बड़ी राजनीतिक घटना की सुर्खी देखता हूं। केवल शीर्षक पढ़कर आगे बढ़ने के बजाय मैं यहां संबंधित व्याख्या देख सकता हूं, फिर यह समझने की कोशिश कर सकता हूं कि घटना का असर किस पर पड़ेगा। कार्यालय में चर्चा होने पर मेरे पास केवल एक वायरल वाक्य नहीं, बल्कि विषय की कुछ पृष्ठभूमि होगी। यदि बात किसी नीति, अदालत या आधिकारिक फैसले से जुड़ी हो, तो मैं इसके बाद मूल सरकारी या संस्थागत स्रोत भी देखूंगा।

इस उदाहरण में ऐप की भूमिका स्पष्ट है: यह पहला समझाने वाला पड़ाव है, अंतिम प्रमाण नहीं। यही संतुलन इसे जिम्मेदारी से इस्तेमाल करने का सबसे अच्छा तरीका बनाता है।

थकान के स्रोत: कब अनुभव कमजोर पड़ता है

सबसे पहली थकान लगातार समाचार देखने से आती है। ऐप की बातचीत वाली भाषा और राय-आधारित प्रस्तुति पढ़ने को आसान बनाती है, लेकिन गंभीर मुद्दों पर यही शैली भावनात्मक असर भी बढ़ा सकती है। अगर आप पहले से समाचार-थकान महसूस करते हैं, तो हर दिन सीमित सामग्री चुनना बेहतर होगा।

दूसरी परेशानी यह हो सकती है कि पाठक तथ्य और टिप्पणी के बीच अंतर को नजरअंदाज कर दे। ऐप का आकर्षण इसके विचार और व्याख्या में है, लेकिन राय को खबर का विकल्प नहीं समझना चाहिए। किसी विवादित विषय पर निर्णय लेने, पोस्ट साझा करने या बहस करने से पहले मूल संदर्भ देखना समझदारी है। यह कमी केवल ऐप की नहीं, बल्कि हर व्याख्यात्मक समाचार मंच की स्वाभाविक सीमा है।

तीसरा trade-off गति और गहराई का है। जो पाठक हर अपडेट तुरंत चाहते हैं, उन्हें यह अनुभव पर्याप्त तेज नहीं लग सकता। दूसरी ओर, जो केवल लंबी, दस्तावेज-आधारित रिपोर्ट पढ़ना चाहते हैं, उन्हें यहां की प्रस्तुति कभी-कभी हल्की लग सकती है। यह बीच का रास्ता इसकी पहचान भी है और सीमा भी।

चौथी सीमा विषय-चयन से जुड़ी है। व्यापक समाचार ऐप होने के कारण यहां सामग्री का दायरा एक ही रुचि तक सीमित नहीं रहता। इससे विविधता मिलती है, लेकिन किसी खास क्षेत्र के विशेषज्ञ पाठक को गहराई के लिए अतिरिक्त स्रोत चाहिए होंगे। तकनीकी खबरों, स्थानीय प्रशासन या उद्योग-विशेष अपडेट के लिए संबंधित प्रकाशन अधिक उपयोगी हो सकता है।

रेटिंग और लोकप्रियता से यह जरूर पता चलता है कि ऐप को काफी लोगों ने अपनाया है: इसकी औसत रेटिंग 4.5 है और इसे 1M+ बार इंस्टॉल किया गया है। फिर भी मैं इन संकेतों को व्यक्तिगत उपयुक्तता का प्रमाण नहीं मानूंगा। किसी को बोलचाल की हिंदी और विचार पसंद आ सकते हैं, जबकि दूसरा पाठक अधिक तटस्थ या संक्षिप्त प्रारूप चुनेगा। ऐप चुनते समय अपनी समाचार आदत को प्राथमिकता देना बेहतर है।

डेवलपर के रूप में टीवी टुडे नेटवर्क लिमिटेड का नाम ऐप की पहचान से जुड़ा है, लेकिन उपयोगकर्ता के लिए अधिक महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि संपादकीय शैली उसकी जरूरत से मेल खाती है या नहीं। केवल बड़े नाम या लोकप्रियता के कारण इसे अपने मुख्य स्रोत के रूप में रखना जरूरी नहीं। पहले कुछ दिनों में देखें कि क्या सामग्री आपको बेहतर समझ देती है या केवल अधिक समय तक स्क्रीन पर रोकती है।

लंबे समय का फैसला: फोन में जगह बनती है या नहीं?

मेरे अंतिम आकलन में दी लल्लनटॉप उन लोगों के लिए फोन में स्थायी जगह पाने योग्य है जो हिंदी में खबरों को संदर्भ, कहानी और विचार के साथ समझना चाहते हैं। इसका मुफ्त होना इसे आजमाने का आसान कारण है, लेकिन लंबे समय तक बनाए रखने की असली वजह इसकी शैली और विषयों को देखने का तरीका है। यह उन पाठकों के लिए खास तौर पर उपयोगी है जो अखबार की औपचारिकता और सोशल मीडिया की अव्यवस्था के बीच संतुलित विकल्प खोज रहे हैं।

मैं इसे अपने एकमात्र समाचार स्रोत के रूप में नहीं रखूंगा। महत्वपूर्ण फैसले, आधिकारिक घोषणाएं, वित्तीय जानकारी और संवेदनशील दावे पढ़ते समय मूल स्रोत से पुष्टि जरूरी है। इसी तरह, अगर आपका लक्ष्य केवल लाइव अपडेट, स्थानीय खबर या किसी एक विषय की विशेषज्ञ रिपोर्टिंग है, तो दूसरा ऐप बेहतर काम कर सकता है।

लेकिन रोजमर्रा की समाचार समझ बनाने, किसी मुद्दे की पृष्ठभूमि जानने और हिंदी में सहज ढंग से समसामयिक घटनाओं से जुड़े रहने के लिए यह मजबूत विकल्प है। इसकी सबसे बड़ी सफलता यह है कि यह खबर को बातचीत योग्य बनाता है; इसकी सबसे बड़ी चुनौती यह है कि पाठक को बातचीत, राय और प्रमाण के बीच फर्क बनाए रखना पड़ता है।

मेरी सलाह सीधी है: इसे डाउनलोड करके कुछ दिनों तक तय समय पर इस्तेमाल करें, हर सामग्री को बिना सोचे स्क्रॉल न करें और गंभीर विषयों पर अतिरिक्त स्रोत देखें। अगर आपको केवल सूचना नहीं बल्कि उसका अर्थ भी जानना पसंद है, तो इसकी उपयोगिता नवीनता खत्म होने के बाद भी बनी रह सकती है। मेरे लिए इसका स्थायी मूल्य तेज खबरों में नहीं, बल्कि खबरों को समझने की आदत बनाने में है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दी लल्लनटॉप ऐप क्या है और इसमें किस तरह की सामग्री मिलती है?

दी लल्लनटॉप एक हिंदी डिजिटल न्यूज़ और मनोरंजन प्लेटफ़ॉर्म है, जहाँ देश-दुनिया की खबरों के साथ राजनीति, खेल, सिनेमा, वायरल मुद्दों और सामाजिक विषयों पर लेख, वीडियो और चर्चाएँ मिलती हैं। इसका अंदाज़ पारंपरिक समाचार ऐप्स से अधिक बातचीत वाला और युवा-केंद्रित है। डाउनलोड करने से पहले ध्यान रखें कि सामग्री की प्रस्तुति तेज़, अनौपचारिक और कभी-कभी राय-प्रधान भी हो सकती है।

क्या दी लल्लनटॉप ऐप मुफ्त में इस्तेमाल किया जा सकता है?

हाँ, दी लल्लनटॉप की अधिकांश समाचार सामग्री, वीडियो और अपडेट आम तौर पर बिना शुल्क के देखे जा सकते हैं। ऐप का उपयोग करने के लिए आपको प्रीमियम सदस्यता लेना आवश्यक नहीं होता, हालांकि इंटरनेट डेटा की जरूरत पड़ेगी। कुछ वीडियो में विज्ञापन दिखाई दे सकते हैं और उपलब्ध सुविधाएँ समय के साथ बदल सकती हैं। डाउनलोड करने से पहले अपने डिवाइस के ऐप स्टोर पर मौजूदा शर्तें और सदस्यता संबंधी जानकारी अवश्य जाँच लें।

क्या ऐप में लाइव न्यूज़, वीडियो और नियमित अपडेट मिलते हैं?

ऐप में समाचार लेखों के अलावा वीडियो रिपोर्ट, इंटरव्यू, चर्चाएँ और विभिन्न विषयों पर नियमित अपडेट देखने को मिल सकते हैं। कुछ कार्यक्रम या कवरेज लाइव अथवा लगभग लाइव रूप में उपलब्ध हो सकते हैं, लेकिन हर खबर के लिए लाइव प्रसारण की गारंटी नहीं होती। वीडियो की गुणवत्ता और चलने की गति आपके इंटरनेट कनेक्शन, डिवाइस और ऐप के नवीनतम संस्करण पर निर्भर करेगी।

क्या दी लल्लनटॉप ऐप हिंदी भाषा सीखने या समाचार समझने वालों के लिए उपयोगी है?

यह ऐप हिंदी में समाचार पढ़ने और समसामयिक विषयों को सरल, संवादात्मक शैली में समझने वाले उपयोगकर्ताओं के लिए उपयोगी हो सकता है। लेखों और वीडियो में आम बोलचाल की भाषा, उदाहरण और संदर्भों का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे सामग्री सहज लगती है। फिर भी गंभीर या संवेदनशील मुद्दों पर बेहतर समझ के लिए आधिकारिक स्रोतों और अन्य विश्वसनीय समाचार माध्यमों से जानकारी की पुष्टि करना उचित रहेगा।

दी लल्लनटॉप ऐप डाउनलोड करने से पहले किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

डाउनलोड करने से पहले अपने फोन में पर्याप्त स्टोरेज, स्थिर इंटरनेट और समर्थित Android या iOS संस्करण उपलब्ध होने की जाँच करें। वीडियो देखने पर मोबाइल डेटा की खपत बढ़ सकती है, इसलिए वाई-फाई का उपयोग सुविधाजनक रहेगा। ऐप में नोटिफिकेशन और विज्ञापन आ सकते हैं, जिन्हें सेटिंग्स से नियंत्रित किया जा सकता है। साथ ही, किसी भी खबर को साझा करने से पहले उसकी तारीख, संदर्भ और स्रोत की पुष्टि करना समझदारी होगी।

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