DIKSHA - for School Education
4.0 शिक्षा 2 सितंबर 2026 को अपडेट किया गया
स्क्रीनशॉट्स
खूबियाँ
- कक्षा 1–12 के लिए पाठ्यपुस्तकें और डिजिटल सामग्री एक जगह मिलती है।
- QR कोड स्कैन करके किताब से जुड़े पाठ तुरंत खोले जा सकते हैं।
- हिंदी समेत कई भारतीय भाषाओं में सामग्री उपलब्ध है।
- शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण और प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम उपयोगी हैं।
- ऑफ़लाइन डाउनलोड से बिना इंटरनेट के भी कई संसाधन देखे जा सकते हैं।
कमियाँ
- सामग्री की गुणवत्ता और उपलब्धता राज्य व कक्षा के अनुसार बदल सकती है।
- ऐप में लॉगिन और पंजीकरण प्रक्रिया कुछ उपयोगकर्ताओं को लंबी लग सकती है।
- पुराने या कम क्षमता वाले फोन पर ऐप धीमा चल सकता है।
- कुछ वीडियो और पाठ खोलने के लिए स्थिर इंटरनेट जरूरी होता है।
- सर्च और नेविगेशन नए उपयोगकर्ताओं के लिए हमेशा सहज नहीं लगते।
विश्लेषणकर्ता Mobexer
जब किसी छात्र को पाठ्यपुस्तक का कोई अध्याय समझ नहीं आता, किसी शिक्षक को कक्षा के लिए अतिरिक्त सामग्री चाहिए होती है, या अभिभावक घर पर पढ़ाई को थोड़ा व्यवस्थित करना चाहता है, तब डिजिटल संसाधन उपयोगी हो सकते हैं। मेरे अनुभव में DIKSHA का सबसे बड़ा फायदा यही है कि यह स्कूली शिक्षा से जुड़ी सामग्री को एक ही जगह खोजने की कोशिश करता है। यह NCERT द्वारा विकसित शिक्षा श्रेणी का निःशुल्क ऐप है और भारत के राष्ट्रीय डिजिटल शिक्षा ढाँचे के रूप में काम करता है।
मैं इसे केवल “वीडियो देखने वाला ऐप” नहीं मानता। इसका असली उपयोग तब सामने आता है जब किताब, शिक्षक, विद्यार्थी और घर पर होने वाली दोहराई—इन चारों के बीच एक छोटा-सा डिजिटल पुल चाहिए। फिर भी यह हर विद्यार्थी के लिए अपने-आप पूरा समाधान नहीं बन जाता। सामग्री खोजने, सही स्तर चुनने और पढ़े हुए को अभ्यास में बदलने की जिम्मेदारी काफी हद तक उपयोगकर्ता पर रहती है।
किताब से समझ तक: DIKSHA के साथ मेरा पूरा इस्तेमाल
शुरुआत कहाँ से होती है
इस ऐप का उपयोग शुरू करने का सबसे स्वाभाविक तरीका किसी मौजूदा स्कूल-पाठ से है। मान लीजिए, बच्चा विज्ञान की किताब में किसी अध्याय पर अटक गया है। ऐसे समय में मैं पहले विषय, कक्षा और भाषा के आधार पर सामग्री ढूँढ़ने की कोशिश करता हूँ, बजाय इसके कि बिना संदर्भ के कोई सामान्य शैक्षिक वीडियो खोजूँ। यही तरीका DIKSHA को सामान्य वीडियो प्लेटफ़ॉर्म से अलग बनाता है: खोज का केंद्र मनोरंजन नहीं, बल्कि पाठ्यक्रम से जुड़ी पढ़ाई है।
अगर आपके पास किताब का कोई पृष्ठ या अध्याय सामने है, तो काम और व्यावहारिक हो जाता है। किताब से शुरू करने पर विद्यार्थी को यह समझने में आसानी रहती है कि डिजिटल सामग्री किस पाठ से संबंधित है। केवल ऐप खोलकर इधर-उधर सामग्री चुनने पर पढ़ाई बिखर सकती है, खासकर छोटे बच्चों के लिए। मेरी सलाह है कि पहले एक स्पष्ट लक्ष्य तय करें—जैसे किसी परिभाषा को समझना, उदाहरण देखना या अगले दिन की कक्षा की तैयारी करना।
DIKSHA की उम्र रेटिंग 3+ है, इसलिए यह छोटे बच्चों से लेकर स्कूली विद्यार्थियों तक के लिए बनाया गया वातावरण दिखाता है। लेकिन उम्र रेटिंग को सीखने की कठिनाई का संकेत नहीं समझना चाहिए। छोटे विद्यार्थी को सामग्री चलाने, पढ़ने और आगे बढ़ने में बड़े की मदद लग सकती है, जबकि बड़े विद्यार्थी स्वयं विषय और भाषा चुनकर काम कर सकते हैं।
सही सामग्री तक पहुँचने का तरीका
मेरे लिए इस ऐप का सबसे महत्वपूर्ण चरण खोज है। कक्षा, विषय, माध्यम और पाठ का नाम जितना स्पष्ट होगा, परिणाम उतने उपयोगी मिलेंगे। अगर बच्चा केवल “गणित” खोजता है, तो विकल्प बहुत व्यापक हो सकते हैं। इसके बजाय अध्याय या अवधारणा के करीब शब्द इस्तेमाल करना बेहतर रहता है। यह छोटा-सा बदलाव समय बचाता है और गलत स्तर की सामग्री चुनने की संभावना घटाता है।
यहाँ एक व्यावहारिक सावधानी जरूरी है: पहली दिखाई देने वाली सामग्री को अंतिम उत्तर न मानें। पहले शीर्षक, भाषा और कक्षा का संदर्भ देखें। कभी-कभी एक ही विषय के लिए अलग-अलग प्रकार की सामग्री मिल सकती है—कहीं समझाने वाला पाठ, कहीं गतिविधि, कहीं पुनरावृत्ति के लिए संसाधन। बच्चे की समस्या के अनुसार चुनाव करें। उसे अवधारणा समझ नहीं आ रही है तो व्याख्या उपयोगी होगी; वह पहले से समझता है लेकिन भूल रहा है तो दोहराई या गतिविधि अधिक काम आ सकती है।
मैं यह भी देखता हूँ कि विद्यार्थी स्क्रीन पर केवल आगे बढ़ रहा है या सचमुच सोच रहा है। वीडियो या डिजिटल पाठ को लगातार चलने देना पढ़ाई जैसा महसूस हो सकता है, लेकिन सीखने का प्रमाण नहीं होता। हर छोटे हिस्से के बाद बच्चे से अपने शब्दों में समझाने को कहें। यही वह कदम है जो ऐप से मिली सामग्री को वास्तविक अध्ययन में बदलता है।
घर पर एक वास्तविक अध्ययन सत्र
एक सामान्य शाम का उदाहरण लें। बच्चा स्कूल से लौटकर बताता है कि उसे भिन्नों का पाठ कठिन लग रहा है। मैं पहले उससे पूछूँगा कि कठिनाई कहाँ है—अंश और हर में, तुलना में, या सवाल हल करने में। फिर DIKSHA में संबंधित कक्षा और विषय की सामग्री खोजी जाएगी। सामग्री मिलने के बाद बच्चा उसे देखेगा या पढ़ेगा, लेकिन बीच-बीच में रुककर अपनी कॉपी में उदाहरण लिखेगा।
इसके बाद मैं ऐप बंद कराकर उससे वही विचार बिना स्क्रीन के समझाने को कहूँगा। अगर वह नहीं समझा पाता, तो समस्या सामग्री तक पहुँचने में नहीं, समझ को अपने शब्दों में बदलने में है। तब उसी विषय की दूसरी सामग्री आजमाना या अगले दिन शिक्षक से पूछना बेहतर होगा। इस workflow में ऐप शुरुआत और सहारा देता है; सीखने का अंतिम काम बातचीत, लेखन और अभ्यास से पूरा होता है।
यह तरीका उन परिवारों के लिए खास तौर पर उपयोगी है जहाँ अभिभावक हर विषय नहीं पढ़ा सकते, लेकिन बच्चे की पढ़ाई की दिशा तय कर सकते हैं। उन्हें विशेषज्ञ बनने की जरूरत नहीं पड़ती। वे बस यह पूछ सकते हैं: आज कौन-सा पाठ है, ऐप में कौन-सी सामग्री चुनी, उससे क्या समझ आया, और कॉपी में कौन-सा उदाहरण हल किया?
शिक्षक और विद्यार्थी के बीच handoff
स्कूल में DIKSHA का उपयोग केवल विद्यार्थी के व्यक्तिगत अध्ययन तक सीमित नहीं होना चाहिए। शिक्षक किसी पाठ से संबंधित डिजिटल सामग्री सुझा सकते हैं, और विद्यार्थी उसे घर पर देखकर अगली कक्षा में सवाल लेकर लौट सकता है। इस आदान-प्रदान का लाभ तभी मिलता है जब शिक्षक यह भी बताए कि सामग्री देखते समय किस बात पर ध्यान देना है। केवल “यह देख लेना” कहने से विद्यार्थी निष्क्रिय दर्शक बन सकता है।
मेरे विचार से बेहतर handoff यह है: शिक्षक एक विषय या पाठ बताता है, विद्यार्थी सामग्री देखता है, फिर दो प्रश्न और एक भ्रम लिखकर कक्षा में लाता है। इससे डिजिटल संसाधन कक्षा का विकल्प नहीं, कक्षा की तैयारी बनता है। शिक्षक भी समझ पाता है कि विद्यार्थी कहाँ अटका है। यह प्रक्रिया सामान्य पाठ्यपुस्तक से आगे बढ़ती है, लेकिन शिक्षक की भूमिका को हटाती नहीं।
अभिभावक के लिए भी handoff स्पष्ट होना चाहिए। यदि बच्चा ऐप में कुछ देखता है और फिर बिना बताए आगे बढ़ जाता है, तो घर वालों को उसकी प्रगति का अंदाजा नहीं लगेगा। एक छोटी नोटबुक में पाठ का नाम, देखी गई सामग्री और बच्चे का अपना निष्कर्ष लिखना उपयोगी है। यह ऐप की किसी विशेष सुविधा पर निर्भर नहीं करता, फिर भी DIKSHA के उपयोग को अधिक व्यवस्थित बना देता है।
जब सामग्री सीखने के परिणाम में बदलती है
किसी ऐप की सफलता इस बात से नहीं मापी जानी चाहिए कि उसमें कितनी सामग्री खुली, बल्कि इससे कि विद्यार्थी उसके बाद क्या कर पाया। DIKSHA के साथ मेरा पसंदीदा तरीका है: पहले डिजिटल सामग्री, फिर कागज पर छोटा अभ्यास, और अंत में मौखिक समझाना। तीनों चरण अलग काम करते हैं। सामग्री परिचय देती है, लिखित अभ्यास पकड़ मजबूत करता है, और मौखिक व्याख्या वास्तविक समझ दिखाती है।
अगर बच्चा अध्याय को अपने शब्दों में बता सकता है, एक नया उदाहरण हल कर सकता है और अपनी गलती पहचान सकता है, तो ऐप ने अपना काम किया। अगर वह केवल स्क्रीन पर दिखाई गई पंक्तियाँ दोहरा रहा है, तो परिणाम अधूरा है। इस फर्क को समझना जरूरी है, क्योंकि डिजिटल शिक्षा में उपयोगकर्ता को अक्सर लगता है कि सामग्री देख लेना ही पढ़ाई पूरी करना है।
मैं DIKSHA को परीक्षा से एक रात पहले सब कुछ सिखा देने वाला साधन नहीं मानूँगा। यह नियमित दोहराई, अवधारणा समझने और शिक्षक द्वारा सुझाए गए संसाधन तक पहुँचने में अधिक उपयोगी है। लंबे समय में छोटे-छोटे सत्र बेहतर परिणाम दे सकते हैं, क्योंकि विद्यार्थी पाठ को कई बार अलग संदर्भ में देख पाता है।
कहाँ friction शुरू होता है
सबसे पहली रुकावट सामग्री की मात्रा हो सकती है। विकल्प मिलने पर चुनाव आसान नहीं हो जाता। छोटे बच्चे के लिए बहुत सारे परिणाम भ्रम पैदा कर सकते हैं, और अभिभावक हर सामग्री की गुणवत्ता या कठिनाई तुरंत नहीं समझ पाता। इसलिए ऐप को बिना योजना के खोलना कम प्रभावी है। पहले पाठ तय करें, फिर खोजें, फिर एक सामग्री चुनकर उसका परिणाम जाँचें।
दूसरी समस्या स्क्रीन पर निर्भरता है। पढ़ाई के नाम पर लगातार वीडियो चलना आँखों और ध्यान दोनों के लिए थकाऊ हो सकता है। DIKSHA का उपयोग छोटे, उद्देश्यपूर्ण हिस्सों में करना बेहतर है। हर सत्र के बाद कॉपी का काम, बातचीत या किताब में वापस लौटना जरूरी है। यदि बच्चा स्क्रीन से हटकर कुछ नहीं कर रहा, तो ऐप का उपयोग कम करके शिक्षक या पुस्तक-केंद्रित तरीका अपनाना अधिक सही हो सकता है।
तीसरी रुकावट भाषा और स्तर का मेल है। भारत में एक ही विषय को अलग भाषाओं और अलग शिक्षण शैलियों में समझने की जरूरत हो सकती है। सही भाषा चुनना पर्याप्त नहीं; शब्दावली बच्चे की परिचित भाषा से मेल खाती है या नहीं, यह भी देखना पड़ता है। यदि डिजिटल सामग्री समझने में किताब से अधिक कठिन लग रही है, तो उसे जबरन जारी रखने के बजाय शिक्षक की व्याख्या या सरल नोट्स बेहतर विकल्प हो सकते हैं।
चौथी बात यह है कि ऐप शिक्षक की व्यक्तिगत प्रतिक्रिया नहीं दे सकता। बच्चा गलती क्यों कर रहा है, उसकी सोच कहाँ मुड़ गई, या उसे किस उदाहरण से समझ आएगा—इन सवालों का उत्तर अक्सर इंसानी बातचीत से मिलता है। DIKSHA सामग्री उपलब्ध करा सकता है, लेकिन हर विद्यार्थी के लिए तुरंत व्यक्तिगत उपचार नहीं बन जाता। यही वह सीमा है जिसे परिवारों को पहले से समझना चाहिए।
सामान्य विकल्पों से तुलना
सामान्य वीडियो प्लेटफ़ॉर्म पर किसी भी विषय के हजारों समझाने वाले वीडियो मिल सकते हैं। उनका फायदा यह है कि किसी कठिन अवधारणा को अलग-अलग शिक्षकों की शैली में देखा जा सकता है। लेकिन वहाँ मनोरंजन, विज्ञापन, असंबंधित सुझाव और कक्षा से बाहर का स्तर भी सामने आ सकता है। DIKSHA का लाभ अधिक संदर्भित खोज है, खासकर तब जब आप स्कूल की किताब और पाठ्यक्रम से जुड़े रहना चाहते हैं।
केवल पाठ्यपुस्तक से पढ़ने पर स्क्रीन का विचलन कम रहता है और बच्चा लिखने की आदत बनाए रखता है। दूसरी ओर, किताब में किसी कठिन चित्र या प्रक्रिया को समझने के लिए अतिरिक्त व्याख्या की जरूरत पड़ सकती है। DIKSHA इस खाली जगह को भर सकता है, लेकिन मैं इसे किताब का पूर्ण प्रतिस्थापन नहीं बनाऊँगा। दोनों को साथ इस्तेमाल करने पर किताब दिशा देती है और ऐप दूसरी व्याख्या या सहायक सामग्री देता है।
निजी कोचिंग या भुगतान वाले सीखने के प्लेटफ़ॉर्म अक्सर अभ्यास, व्यक्तिगत मार्गदर्शन और नियमित परीक्षण पर अधिक जोर दे सकते हैं। उनका अनुभव कुछ विद्यार्थियों के लिए अधिक निर्देशित हो सकता है, लेकिन हर परिवार के लिए वह आवश्यक या सुविधाजनक नहीं होता। DIKSHA का निःशुल्क होना इसे कम लागत में शुरुआत करने वालों के लिए आकर्षक बनाता है। बदले में आपको अपनी योजना, चयन और प्रगति की निगरानी खुद करनी पड़ती है।
किसके लिए यह अच्छा चुनाव है
यह ऐप उन विद्यार्थियों के लिए अच्छा है जो स्कूल के पाठ को घर पर दोहराना चाहते हैं, किसी अध्याय की दूसरी व्याख्या चाहते हैं या शिक्षक द्वारा सुझाए गए डिजिटल संसाधन तक पहुँचना चाहते हैं। ग्रामीण और छोटे शहरों के परिवारों के लिए भी यह उपयोगी हो सकता है, खासकर जब उन्हें पाठ्यक्रम से जुड़ी सामग्री एक जगह खोजनी हो। शिक्षक इसे कक्षा से पहले तैयारी या कक्षा के बाद पुनरावृत्ति के सहायक साधन के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं।
अभिभावक भी इसका लाभ उठा सकते हैं, भले ही वे विषय विशेषज्ञ न हों। वे बच्चे के साथ बैठकर सामग्री चुन सकते हैं, प्रश्न पूछ सकते हैं और कॉपी में परिणाम देख सकते हैं। इस तरह ऐप अकेले बच्चे को स्क्रीन सौंपने का साधन नहीं रहता, बल्कि घर की पढ़ाई में एक साझा गतिविधि बन जाता है।
इसके विपरीत, जो विद्यार्थी पूरी तरह व्यक्तिगत tutor-जैसी मदद, तुरंत शंका समाधान या लगातार परीक्षा-विश्लेषण चाहते हैं, उन्हें केवल DIKSHA से संतुष्टि नहीं मिल सकती। इसी तरह, यदि किसी बच्चे को पढ़ने में विशेष कठिनाई है या वह लंबे डिजिटल पाठ पर ध्यान नहीं रख पाता, तो शिक्षक, अभिभावक और ऑफलाइन गतिविधियों की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण होगी।
संस्करण, पहुँच और रोजमर्रा की उपयोगिता
यह ऐप 20 जुलाई 2018 को जारी हुआ था और इसका वर्तमान संस्करण 6.1.34 है। Android पर इसे चलाने के लिए न्यूनतम OS 8.1 चाहिए। इसलिए पुराने उपकरण वाले परिवार को पहले अपने फोन की संगतता देखनी चाहिए। तकनीकी रूप से ऐप चल जाना और पढ़ाई के लिए आरामदायक होना अलग बातें हैं; छोटे स्क्रीन, धीमे प्रदर्शन या सीमित संग्रहण से अनुभव प्रभावित हो सकता है।
DIKSHA की लोकप्रियता भी कम नहीं है: इसे 50 मिलियन से अधिक बार इंस्टॉल किया जा चुका है। इसकी औसत रेटिंग 4.0 है, जो बताती है कि बहुत से उपयोगकर्ताओं के लिए यह काम का है, लेकिन अनुभव हर व्यक्ति के लिए समान नहीं होगा। मेरे लिए इसका अर्थ है कि इसे आजमाने की लागत कम है, पर उपयोग से पहले अपने स्कूल, कक्षा और भाषा के अनुसार सामग्री की उपयोगिता जाँचना फिर भी जरूरी है।
ऐप निःशुल्क है, जो इसे शुरुआत के लिए सुविधाजनक बनाता है। फिर भी “मुफ्त” का मतलब यह नहीं कि समय और ध्यान की कोई कीमत नहीं है। यदि परिवार हर दिन बिना लक्ष्य के सामग्री खोजता रहेगा, तो उपयोग कम प्रभावी होगा। बेहतर है कि सप्ताह में कुछ निश्चित अध्ययन सत्र तय किए जाएँ और हर सत्र का छोटा परिणाम लिखा जाए।
मेरी अंतिम राय
मेरे हिसाब से DIKSHA का सही मूल्य इसकी राष्ट्रीय पहुँच और स्कूल-केंद्रित उपयोग में है। यह उस विद्यार्थी के लिए खासा मददगार हो सकता है जिसे किताब के साथ दूसरी व्याख्या चाहिए, और उस शिक्षक के लिए भी जो कक्षा के बाहर सीखने का एक साझा संसाधन देना चाहता है। इसका उपयोग सबसे अच्छा तब होता है जब डिजिटल सामग्री किसी स्पष्ट पाठ, सवाल या सीखने के लक्ष्य से जुड़ी हो।
मैं इसे बच्चे को अकेले देकर “अब पढ़ लो” नहीं कहूँगा। मैं किताब से शुरुआत करूँगा, सही कक्षा और विषय चुनूँगा, सामग्री को छोटे हिस्से में देखूँगा, फिर कॉपी में अभ्यास और बातचीत कराऊँगा। अगर परिणाम नहीं आता, तो उसी सामग्री को बार-बार चलाने के बजाय शिक्षक से सवाल पूछूँगा या ऑफलाइन तरीका बदलूँगा। DIKSHA की असली ताकत सामग्री तक पहुँच नहीं, बल्कि सामग्री को सही अध्ययन-क्रम में जोड़ने पर दिखाई देती है।
NCERT का यह शिक्षा ऐप उन लोगों के लिए निःशुल्क और व्यावहारिक शुरुआत है जो स्कूल की पढ़ाई को डिजिटल सहारे से मजबूत करना चाहते हैं। लेकिन इसे चमत्कारी शिक्षक या हर समस्या का उत्तर समझना ठीक नहीं होगा। मेरी सिफारिश है कि इसे किताब, शिक्षक और लिखित अभ्यास के साथ इस्तेमाल करें—तभी यह स्क्रीन पर बिताए समय को वास्तविक समझ और बेहतर तैयारी में बदल पाएगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
DIKSHA - for School Education क्या है और इसका उपयोग किसके लिए किया जाता है?
DIKSHA भारत में स्कूली शिक्षा के लिए बनाया गया डिजिटल लर्निंग प्लेटफ़ॉर्म है। इसमें विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों के लिए पाठ्यपुस्तक से जुड़े डिजिटल संसाधन, वीडियो, अभ्यास, क्विज़ और प्रशिक्षण सामग्री उपलब्ध होती है। सामग्री राज्य, बोर्ड, कक्षा और विषय के अनुसार अलग-अलग हो सकती है, इसलिए डाउनलोड से पहले अपने क्षेत्र की पाठ्यक्रम-संगत सामग्री की उपलब्धता जाँचना उपयोगी रहेगा।
क्या DIKSHA ऐप में NCERT और राज्य बोर्ड की पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध होती हैं?
DIKSHA में कई NCERT और राज्य बोर्ड से संबंधित ई-सामग्री तथा पाठ्यपुस्तक के अध्यायों से जुड़े संसाधन मिल सकते हैं, लेकिन हर राज्य, कक्षा और विषय के लिए सामग्री समान नहीं होती। कुछ पुस्तकों में QR कोड दिए होते हैं, जिन्हें ऐप से स्कैन करके संबंधित वीडियो या गतिविधि खोली जा सकती है। उपलब्धता आपके बोर्ड और चुनी गई भाषा पर निर्भर करती है।
क्या DIKSHA का उपयोग बिना इंटरनेट के भी किया जा सकता है?
DIKSHA में कुछ सामग्री को पहले इंटरनेट के माध्यम से खोलकर या डाउनलोड करके बाद में ऑफलाइन देखने की सुविधा मिल सकती है। हालांकि सभी वीडियो, पाठ्यक्रम, क्विज़ या इंटरैक्टिव गतिविधियाँ ऑफलाइन उपलब्ध हों, यह आवश्यक नहीं है। सामग्री डाउनलोड करने के लिए पर्याप्त स्टोरेज और प्रारंभिक इंटरनेट कनेक्शन चाहिए। ऑफलाइन उपयोग से पहले आवश्यक पाठ या संसाधन डाउनलोड करके जाँच लेना बेहतर है।
क्या DIKSHA ऐप विद्यार्थियों के साथ-साथ शिक्षकों के लिए भी उपयोगी है?
हाँ, DIKSHA केवल विद्यार्थियों के लिए नहीं है। शिक्षक इसमें प्रशिक्षण पाठ्यक्रम, शिक्षण योजनाएँ, कक्षा गतिविधियाँ, मूल्यांकन सामग्री और पेशेवर विकास से जुड़े संसाधन प्राप्त कर सकते हैं। विद्यार्थी वीडियो, अभ्यास और विषयवार सामग्री का उपयोग कर सकते हैं, जबकि अभिभावक बच्चों की पढ़ाई में सहायता के लिए सामग्री देख सकते हैं। सुविधाएँ राज्य और उपयोगकर्ता प्रोफ़ाइल के अनुसार बदल सकती हैं।
क्या DIKSHA ऐप में लॉगिन करना आवश्यक है और क्या यह सुरक्षित है?
कुछ सामग्री DIKSHA पर बिना लॉगिन के देखी जा सकती है, लेकिन पाठ्यक्रम में नामांकन, प्रगति सुरक्षित रखने, प्रमाणपत्र प्राप्त करने या व्यक्तिगत सुविधाओं का उपयोग करने के लिए लॉगिन की आवश्यकता पड़ सकती है। ऐप इस्तेमाल करते समय केवल आधिकारिक Google Play Store या Apple App Store से डाउनलोड करें। अपना पासवर्ड, OTP और व्यक्तिगत जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें।











