ShareKaro Lite: File Share App

4.0 प्रॉडक्टिविटी 6 सितंबर 2026 को अपडेट किया गया

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खूबियाँ

  • इंटरनेट के बिना भी नज़दीकी डिवाइसों में फाइल भेज सकते हैं।
  • लाइट वर्जन कम स्टोरेज और सीमित संसाधनों वाले फोन के लिए उपयुक्त है।
  • फोटो
  • वीडियो
  • ऐप और दस्तावेज़ जैसे कई फाइल प्रकार साझा करता है।
  • क्यूआर कोड या लिंक से कनेक्शन शुरू करना आसान लगता है।
  • बड़े फाइल ट्रांसफर के लिए ब्लूटूथ से तेज़ प्रदर्शन दे सकता है।

कमियाँ

  • दोनों डिवाइसों में ऐप इंस्टॉल होना आवश्यक हो सकता है।
  • कनेक्शन के लिए लोकेशन और स्टोरेज जैसी अनुमतियाँ मांग सकता है।
  • बहुत दूर या बाधाओं वाले स्थान पर ट्रांसफर अस्थिर हो सकता है।
  • कुछ डिवाइसों पर विज्ञापन अनुभव को परेशान कर सकते हैं।
  • अज्ञात डिवाइस से फाइल स्वीकार करने पर सुरक्षा जोखिम रह सकता है।
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Mobexer विश्लेषणकर्ता Mobexer

फोन बदलते समय, किसी दोस्त को बड़ी वीडियो भेजते समय या कंप्यूटर से मोबाइल में फाइल लाते समय सबसे ज्यादा समय अक्सर फाइल चुनने में नहीं, बल्कि सही तरीका खोजने में जाता है। कभी केबल नहीं मिलती, कभी क्लाउड पर अपलोड पूरा होने का इंतजार करना पड़ता है, और कभी सामने वाले डिवाइस के साथ संगतता की समस्या आ जाती है। मैंने ShareKaro Lite को इसी रोजमर्रा की परेशानी के नजरिए से इस्तेमाल किया: क्या यह दो डिवाइस के बीच फाइल साझा करने की प्रक्रिया को सचमुच छोटा और आसान बनाता है?

मेरे अनुभव में, यह उत्पादकता श्रेणी का उपयोगी ऐप है, खासकर तब जब सामने Android, iPhone और PC जैसे अलग-अलग प्लेटफॉर्म हों। इसका काम मनोरंजन या क्लाउड स्टोरेज देना नहीं, बल्कि एक डिवाइस से दूसरे डिवाइस तक सामग्री पहुंचाने की प्रक्रिया को सरल बनाना है। ShareKaro Team का यह ऐप मुफ्त है और इसे 3+ उम्र के लिए रेट किया गया है, इसलिए परिवार में सामान्य फाइल साझा करने के लिए इसका इस्तेमाल समझना कठिन नहीं लगता।

इसकी लोकप्रियता भी मामूली नहीं है। इसे सौ मिलियन से अधिक बार इंस्टॉल किया जा चुका है, जबकि इसकी औसत रेटिंग 4.0 है, जो लगभग दो लाख पचहत्तर हजार रेटिंग पर आधारित है। मेरे लिए इन आंकड़ों का अर्थ यह है कि ऐप ने बहुत बड़े उपयोगकर्ता वर्ग की रोजमर्रा की जरूरत पकड़ी है, लेकिन हर उपयोगकर्ता के लिए अनुभव समान रूप से सहज होगा, ऐसा मान लेना ठीक नहीं होगा।

जहां यह ऐप सबसे ज्यादा समय बचाता है

पहली बार इस्तेमाल में सही शुरुआत

पहली बार खोलने पर मेरा सुझाव है कि आप तुरंत कोई बड़ा ट्रांसफर शुरू न करें। पहले यह समझ लें कि भेजने वाला और पाने वाला डिवाइस कौन-सा है, किस डिवाइस पर ShareKaro Lite खुला रहेगा और किस तरह की फाइल भेजनी है। यह छोटा-सा अभ्यास बाद में गलती से गलत फोटो, वीडियो या दस्तावेज चुनने से बचाता है। खासकर फोन बदलते समय एक साथ बहुत सारी सामग्री चुनना आसान है, लेकिन उससे पहले फोल्डर और फाइलों को व्यवस्थित कर लेना बेहतर रहता है।

Android से Android के बीच इसका उपयोग सबसे सीधा महसूस होता है, क्योंकि दोनों तरफ ऐप का अनुभव समान रहता है। जब iPhone या PC को शामिल किया जाता है, तो प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा डिवाइस पहचानना और सही प्राप्तकर्ता चुनना बन जाता है। यहां मेरी व्यावहारिक सलाह है कि दोनों डिवाइस को पास रखें और भेजने से पहले फाइल का नाम, आकार और प्रकार देख लें। इससे कनेक्शन बन जाने के बाद दोबारा चयन करने की जरूरत कम होती है।

ऐप का मौजूदा संस्करण 5.1.9 है और यह Android 5.0 या उसके बाद के संस्करण पर चलने के लिए बनाया गया है। इसका मतलब है कि बहुत पुराने Android फोन वाले उपयोगकर्ता भी इसे आजमा सकते हैं, बशर्ते फोन उस न्यूनतम सिस्टम आवश्यकता को पूरा करता हो। किसी पुराने फोन पर इस्तेमाल करते समय मैं पहले छोटी फाइल से परीक्षण करूंगा, क्योंकि पुराने हार्डवेयर पर फाइल चुनने, सूची बनाने और ट्रांसफर संभालने का अनुभव नए फोन जैसा तेज महसूस नहीं हो सकता।

डेवलपर का नाम ShareKaro Team है, और ऐप का मुख्य आकर्षण यही है कि यह Android, iOS और PC के बीच फाइल साझा करने की जरूरत को एक ही उपयोगिता में समेटने की कोशिश करता है। यह बात उन लोगों के लिए खास मायने रखती है जिनके घर में अलग-अलग ब्रांड के फोन हैं या जो मोबाइल और कंप्यूटर के बीच काम करते हैं। फिर भी, क्रॉस-प्लेटफॉर्म सुविधा का लाभ तभी मिलता है जब दोनों तरफ की प्रक्रिया ध्यान से पूरी की जाए; केवल ऐप इंस्टॉल कर लेना पर्याप्त नहीं है।

एक सामान्य दिन में इसका वास्तविक उपयोग

मान लीजिए मैंने किसी यात्रा के दौरान कई वीडियो बनाए और घर लौटकर उन्हें अपने कंप्यूटर पर देखना चाहता हूं। यदि मेरे पास उपयुक्त केबल नहीं है, तो सामान्य विकल्प क्लाउड स्टोरेज में अपलोड करना होगा। वहां इंटरनेट की गति, उपलब्ध जगह और अपलोड पूरा होने का इंतजार बीच में आ जाता है। ShareKaro Lite जैसे ऐप का व्यावहारिक लाभ यह है कि मैं सीधे स्थानांतरण पर ध्यान दे सकता हूं, न कि पहले फाइल को किसी ऑनलाइन खाते में चढ़ाने पर।

दूसरा उदाहरण परिवार का है। किसी रिश्तेदार के फोन में तस्वीरें भेजनी हों, तो मैसेजिंग ऐप अक्सर गुणवत्ता घटा सकता है या बड़े वीडियो पर सीमा लगा सकता है। यहां अलग फाइल साझा करने वाला ऐप अधिक उपयुक्त लगता है, क्योंकि बातचीत के संदेशों और मीडिया भेजने की सीमा से काम अलग रहता है। मेरी आदत यह होगी कि तस्वीरों का पूरा समूह भेजने से पहले कुछ चुनी हुई फाइलें भेजकर देखूं कि सामने वाले डिवाइस पर वे सही जगह और सही रूप में पहुंच रही हैं।

फोन बदलने के समय इसका उपयोग और भी स्पष्ट हो जाता है। संपर्क, बैंकिंग या अन्य संवेदनशील जानकारी के लिए मैं अलग बैकअप प्रक्रिया अपनाऊंगा, लेकिन निजी फोटो, वीडियो और सामान्य दस्तावेजों को स्थानांतरित करने में यह उपयोगी सहायक बन सकता है। यहां एक महत्वपूर्ण सावधानी है: पुराने फोन को तुरंत मिटाने के बजाय नए फोन पर फाइलें खोलकर जांचना चाहिए। ट्रांसफर पूरा दिखना और हर जरूरी फाइल वास्तव में मिल जाना दो अलग बातें हैं।

छोटे व्यवसाय या पढ़ाई के काम में भी इसका स्थान है। किसी प्रस्तुति, पीडीएफ या प्रोजेक्ट फोल्डर को कंप्यूटर से फोन में लाना हो, तो बार-बार ईमेल भेजना अव्यवस्थित हो सकता है। ShareKaro Lite उस अतिरिक्त चरण को कम कर सकता है। हालांकि बहुत संवेदनशील कार्यालय फाइलों के मामले में मैं पहले संगठन की सुरक्षा नीति देखूंगा, क्योंकि सुविधा और गोपनीयता का संतुलन हमेशा उपयोगकर्ता के नियंत्रण में नहीं होता।

कौन-सी झुंझलाहट कम होती है

इस ऐप की सबसे बड़ी उपयोगिता किसी चमकदार अतिरिक्त सुविधा में नहीं, बल्कि छोटे-छोटे रुकावटों को हटाने में है। फाइल को पहले ईमेल में जोड़ना, आकार सीमा देखना, क्लाउड लिंक बनाना, फिर सामने वाले को डाउनलोड करने के लिए कहना—इन चरणों की जगह सीधा साझा करने का तरीका मिल जाता है। जब काम केवल कुछ फोटो या एक वीडियो का हो, तो यह अंतर मामूली लगता है; लेकिन बार-बार होने वाले ट्रांसफर में यही बचा हुआ समय महत्वपूर्ण बनता है।

मुझे इसका एक कम स्पष्ट लाभ फाइल चयन के स्तर पर दिखता है। यदि आप हर बार पूरा कैमरा फोल्डर भेजने के बजाय पहले से एल्बम या काम के अनुसार सामग्री अलग रखते हैं, तो ऐप का उपयोग काफी अधिक नियंत्रित हो जाता है। यह केवल तेज ट्रांसफर का मामला नहीं है; सही सामग्री भेजने से प्राप्तकर्ता को बाद में छंटाई नहीं करनी पड़ती। इसलिए मेरी सलाह है कि भेजने से पहले चयन को एक छोटे कार्य की तरह लें, न कि अंतिम क्षण में स्क्रीन पर दिख रही हर चीज चुन लें।

एक और उपयोगी तरीका है बड़े काम को तार्किक हिस्सों में बांटना। उदाहरण के लिए, किसी पुराने फोन की सारी मीडिया एक ही बार में भेजने के बजाय पहले फोटो, फिर वीडियो और अंत में दस्तावेज भेजना अधिक व्यवस्थित हो सकता है। इससे बीच में रुकावट आने पर यह समझना आसान रहता है कि कौन-सा हिस्सा पूरा हो चुका है। मैं इसे ऐप की कोई गारंटीकृत विशेष क्षमता नहीं कहूंगा, बल्कि वास्तविक उपयोग में अपनाई जाने वाली ऐसी कार्य-पद्धति मानता हूं जो गलती और दोहराव घटाती है।

क्रॉस-प्लेटफॉर्म उपयोग में एक व्यावहारिक trade-off भी है। Android से Android के बीच परिचितता अधिक रहती है, जबकि iPhone या PC को शामिल करने पर उपयोगकर्ता को दोनों डिवाइसों पर सही चरण पूरे करने पड़ सकते हैं। इसलिए यदि आपका काम कभी-कभार छोटा ट्रांसफर है, तो यह सुविधा बहुत काम की लग सकती है; लेकिन यदि आपको हर दिन जटिल, बड़े और संवेदनशील प्रोजेक्ट साझा करने हैं, तो अधिक औपचारिक फाइल प्रबंधन प्रणाली बेहतर हो सकती है।

इंटरनेट, केबल और क्लाउड के मुकाबले अनुभव

क्लाउड स्टोरेज का लाभ यह है कि फाइलें ऑनलाइन उपलब्ध रहती हैं और बाद में दूसरे डिवाइस से भी खोली जा सकती हैं। ShareKaro Lite का उपयोग उस स्थिति में अधिक तर्कसंगत है जब मेरा लक्ष्य स्थायी ऑनलाइन बैकअप नहीं, बल्कि एक डिवाइस से दूसरे डिवाइस तक सामग्री पहुंचाना हो। यदि मुझे फाइल कई दिनों तक अलग-अलग जगहों से खोलनी है, तो क्लाउड सेवा ज्यादा सुविधाजनक हो सकती है।

मैसेजिंग ऐप छोटे फोटो और सामान्य दस्तावेजों के लिए आसान लगते हैं, क्योंकि वे पहले से फोन में मौजूद होते हैं। लेकिन बड़े वीडियो, फाइलों के समूह या मूल गुणवत्ता बनाए रखने की जरूरत में अलग साझा करने वाला ऐप अधिक उपयुक्त महसूस हो सकता है। फिर भी यह मानना सही नहीं होगा कि हर ट्रांसफर के लिए ShareKaro Lite बेहतर है। एक-दो छोटी फाइल भेजने के लिए बातचीत वाली ऐप खोलना कम चरणों वाला विकल्प हो सकता है।

केबल सबसे सीधा और कई बार सबसे भरोसेमंद साधन हो सकता है, खासकर जब दोनों डिवाइस आपके पास हों और सही केबल उपलब्ध हो। इसकी परेशानी यह है कि केबल साथ रखना पड़ता है और अलग-अलग पोर्ट या डिवाइस के लिए उपयुक्त कनेक्शन चाहिए। ShareKaro Lite उस भौतिक निर्भरता को कम करता है, लेकिन बदले में ऐप के भीतर डिवाइस पहचान और ट्रांसफर प्रक्रिया पर निर्भरता बढ़ाता है। मेरे हिसाब से दोनों में से चुनाव सुविधा की आदत पर नहीं, उस समय उपलब्ध साधनों पर होना चाहिए।

जहां अनुभव पूरी तरह बे friction नहीं है

किसी भी फाइल ट्रांसफर ऐप की तरह यहां भी सफलता केवल भेजने वाले बटन पर निर्भर नहीं करती। सामने वाला डिवाइस तैयार न हो, सही ऐप स्क्रीन खुली न हो या उपयोगकर्ता गलत डिवाइस चुन ले, तो सीधा अनुभव टूट सकता है। इसलिए मैं इसे ऐसे व्यक्ति के लिए आदर्श नहीं मानता जो तकनीकी चरणों से बिल्कुल बचना चाहता है और केवल एक टैप में हर परिस्थिति का समाधान चाहता है।

बहुत बड़े ट्रांसफर में धैर्य रखना जरूरी है। वीडियो और अन्य भारी फाइलों के मामले में फोन को बीच में बंद करना, ऐप बदलना या डिवाइस दूर ले जाना प्रक्रिया को असुविधाजनक बना सकता है। मैं ऐसे काम को तब शुरू करूंगा जब दोनों डिवाइस स्थिर जगह पर हों और मुझे बीच में फोन का जरूरी काम न करना पड़े। यह सावधानी ऐप की कमी भर नहीं है; वायरलेस फाइल साझा करने की सामान्य वास्तविकता भी है।

एक और सीमा यह है कि यह बैकअप रणनीति का पूरा विकल्प नहीं है। स्थानांतरण के बाद फाइलें नए डिवाइस पर पहुंच सकती हैं, लेकिन इससे अपने-आप दीर्घकालिक सुरक्षा, संस्करण इतिहास या आकस्मिक नुकसान से बचाव सुनिश्चित नहीं होता। महत्वपूर्ण तस्वीरों और दस्तावेजों के लिए मैं दूसरी कॉपी भी रखूंगा। ShareKaro Lite को मैं “अभी यहां से वहां भेजना” वाला औजार मानता हूं, “हमेशा सुरक्षित संग्रह” वाला समाधान नहीं।

गोपनीय सामग्री भेजते समय भी जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। प्राप्तकर्ता का नाम या डिवाइस सही है या नहीं, फाइलों का चयन उचित है या नहीं और ट्रांसफर के बाद साझा सामग्री कहां रखी जाएगी—इन बातों पर ध्यान देना जरूरी है। सुविधा के कारण उपयोगकर्ता अक्सर पुष्टि का चरण छोड़ देता है, जबकि यही वह जगह है जहां निजी फोटो या गलत दस्तावेज अनजाने में भेजे जा सकते हैं।

किसके लिए यह अच्छा चुनाव है

मैं इसे उन लोगों को सुझाऊंगा जिन्हें अक्सर Android फोन, iPhone और PC के बीच फोटो, वीडियो या सामान्य दस्तावेज ले जाने पड़ते हैं। परिवार में अलग-अलग फोन इस्तेमाल होते हों, नया डिवाइस सेट करना हो या केबल हर समय उपलब्ध न रहती हो, तो यह मुफ्त उपयोगिता रोजमर्रा का काम हल्का कर सकती है। इसकी उपयोगिता उन क्षणों में सबसे अधिक है जब लक्ष्य स्पष्ट है और आपको फाइल को तुरंत दूसरे डिवाइस तक पहुंचाना है।

यह उन उपयोगकर्ताओं के लिए भी ठीक है जो क्लाउड खाते, शेयर लिंक और ईमेल अटैचमेंट के बीच घूमना नहीं चाहते। ऐप की 3+ रेटिंग इसे सामान्य पारिवारिक उपयोग के लिए सहज बनाती है, हालांकि बच्चों को निजी फाइल साझा करने से पहले किसी बड़े की निगरानी फिर भी जरूरी है। सरलता का अर्थ यह नहीं कि हर चयन अपने-आप सुरक्षित हो जाएगा।

दूसरी ओर, यदि आपकी प्राथमिकता स्वचालित बैकअप, ऑनलाइन सिंक्रोनाइजेशन, फाइलों का पुराना संस्करण या टीम-स्तरीय नियंत्रण है, तो क्लाउड-आधारित विकल्प अधिक सही बैठ सकता है। यदि आप केवल बहुत छोटी फाइलें भेजते हैं, तो मैसेजिंग ऐप पर्याप्त हो सकती है। और यदि आपके पास भरोसेमंद केबल हमेशा रहती है, तो वायर्ड ट्रांसफर कई परिस्थितियों में कम अनिश्चित लग सकता है।

मेरा निष्कर्ष: समय बचाने वाला, लेकिन सही काम के लिए

22 दिसंबर 2020 को जारी हुआ ShareKaro Lite अब अपने 5.1.9 संस्करण में मौजूद है और बड़े उपयोगकर्ता आधार तक पहुंच चुका है। मेरे लिए इसकी असली ताकत लोकप्रियता नहीं, बल्कि काम की स्पष्टता है: जब मुझे फाइल को ऑनलाइन जमा किए बिना दूसरे डिवाइस तक पहुंचाना हो, तब यह अतिरिक्त चरणों को कम कर सकता है। इसका मूल्य उस समय समझ आता है जब केबल नहीं है, प्लेटफॉर्म अलग हैं या मैसेजिंग ऐप का तरीका भारी पड़ रहा है।

फिर भी मैं इसे हर फाइल समस्या का सार्वभौमिक उत्तर नहीं कहूंगा। बड़े ट्रांसफर के लिए दोनों डिवाइस तैयार रखने होंगे, महत्वपूर्ण सामग्री के लिए अलग बैकअप रखना होगा और संवेदनशील फाइल भेजते समय प्राप्तकर्ता की दोबारा जांच करनी होगी। इन सीमाओं को स्वीकार करके इस्तेमाल करने पर अनुभव अधिक भरोसेमंद बनता है।

मेरी अंतिम राय में, ShareKaro Lite उन उपयोगकर्ताओं के लिए सबसे उपयोगी है जो समय बचाना चाहते हैं, न कि अपनी पूरी फाइल व्यवस्था बदलना। यह मुफ्त है, पुराने Android संस्करणों पर भी चल सकता है और Android, iOS तथा PC के बीच साझा करने की जरूरत को एक जगह लाता है। मैं इसे अपने फोन में एक जरूरी आपातकालीन औजार की तरह रखूंगा—हर दिन खोलने के लिए नहीं, लेकिन उस दिन के लिए जब कोई बड़ी फाइल तुरंत दूसरे डिवाइस तक पहुंचानी हो और सामान्य तरीकों में अनावश्यक रुकावट आ रही हो।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ShareKaro Lite क्या है और इसका उपयोग किस काम के लिए किया जाता है?

ShareKaro Lite एक फ़ाइल शेयरिंग ऐप है, जिसकी मदद से आप मोबाइल के बीच फ़ोटो, वीडियो, संगीत, दस्तावेज़ और अन्य फाइलें भेज या प्राप्त कर सकते हैं। यह इंटरनेट डेटा या मोबाइल नेटवर्क पर निर्भरता कम करने के लिए सीधे डिवाइस कनेक्शन का उपयोग कर सकता है। ऐप डाउनलोड करने से पहले अपने फोन के स्टोरेज, Android संस्करण और आवश्यक अनुमतियों की संगतता अवश्य जांचें।

क्या ShareKaro Lite से फाइल भेजने के लिए इंटरनेट कनेक्शन जरूरी है?

कई मामलों में ShareKaro Lite डिवाइस-टू-डिवाइस कनेक्शन के माध्यम से फाइल ट्रांसफर कर सकता है, इसलिए बड़ी फाइलें भेजने के लिए मोबाइल डेटा की आवश्यकता नहीं पड़ सकती। हालांकि, कनेक्शन बनाने, ऐप के कुछ ऑनलाइन फीचर्स इस्तेमाल करने या विज्ञापन लोड करने के लिए Wi-Fi या इंटरनेट की जरूरत हो सकती है। बेहतर गति के लिए दोनों फोन पास रखें और Wi-Fi तथा Bluetooth की अनुमति सक्रिय रखें।

ShareKaro Lite किन प्रकार की फाइलों को साझा कर सकता है?

ऐप सामान्यतः फ़ोटो, वीडियो, ऑडियो फाइल, PDF, दस्तावेज़, ऐप पैकेज और अन्य चुनी हुई फाइलों को साझा करने की सुविधा देता है। वास्तविक सपोर्ट फोन के ऑपरेटिंग सिस्टम, फाइल फॉर्मेट और ऐप संस्करण पर निर्भर कर सकता है। बहुत बड़ी फाइलों या असामान्य फॉर्मेट को भेजने से पहले प्राप्तकर्ता के फोन में पर्याप्त खाली जगह और उस फाइल को खोलने वाला उपयुक्त ऐप मौजूद होना चाहिए।

क्या ShareKaro Lite सुरक्षित है और इसे कौन-कौन सी अनुमतियां देनी पड़ती हैं?

फाइल शेयरिंग ऐप को काम करने के लिए आमतौर पर स्टोरेज या मीडिया, नजदीकी डिवाइस, Wi-Fi और कभी-कभी स्थान जैसी अनुमतियों की जरूरत पड़ सकती है। इंस्टॉल करने से पहले ऐप की गोपनीयता नीति और Play Store या App Store पर दी गई जानकारी पढ़ना उचित है। केवल भरोसेमंद लोगों से कनेक्ट करें, अनजान फाइलें न खोलें और जरूरत खत्म होने पर संवेदनशील अनुमतियां बंद कर दें।

क्या ShareKaro Lite पुराने या कम स्टोरेज वाले फोन पर ठीक से काम करता है?

Lite संस्करण आमतौर पर कम संसाधनों वाले फोन के लिए बनाया जाता है, इसलिए यह पूर्ण संस्करण की तुलना में कम स्टोरेज और RAM का उपयोग कर सकता है। फिर भी ट्रांसफर के दौरान अस्थायी फाइलों के लिए अतिरिक्त जगह चाहिए होती है। पुराने फोन में कनेक्शन धीमा हो सकता है या कुछ फीचर उपलब्ध न हों। डाउनलोड से पहले ऐप का आकार, समर्थित Android संस्करण और पर्याप्त खाली स्टोरेज जांच लें।

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